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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - जिहाद लड़ाई के चरण युद्ध के परिणाम युद्ध - बंदी कैदियों की रिहाई

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कुल श्लोक : 1
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Q.S मुहम्मद (47:4)

فَاِذَا لَقِيْتُمُ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا فَضَرْبَ الرِّقَابِۗ حَتّٰٓى اِذَآ اَثْخَنْتُمُوْهُمْ فَشُدُّوا الْوَثَاقَۖ فَاِمَّا مَنًّاۢ بَعْدُ وَاِمَّا فِدَاۤءً حَتّٰى تَضَعَ الْحَرْبُ اَوْزَارَهَا ەۛ ذٰلِكَ ۛ وَلَوْ يَشَاۤءُ اللّٰهُ لَانْتَصَرَ مِنْهُمْ وَلٰكِنْ لِّيَبْلُوَا۟ بَعْضَكُمْ بِبَعْضٍۗ وَالَّذِيْنَ قُتِلُوْا فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ فَلَنْ يُّضِلَّ اَعْمَالَهُمْ

fa iżā laqītumul-lażīna kafarū faḍarbar-riqāb(i), ḥattā iżā aṡkhantumūhum fa syuddul-waṡāq(a), fa'immā mannam ba‘du wa immā fidā'an ḥattā taḍa‘al-ḥarbu auzārahā - żālika - wa lau yasyā'ullāhu lantaṣara minhum wa lākil liyabluwa ba‘ḍakum biba‘ḍ(in), wal-lażīna qutilū fī sabīlillāhi falay yuḍilla a‘mālahum.

तो जब तुम काफ़िरों से (जंग के मैदान में) मुलाक़ात करो, तो उनकी गर्दनें मारो। फिर जब तुम उन्हें पूरी तरह हरा दो, तो उन्हें (क़ैद) बाँध लो, और इसके बाद तुम उन्हें या तो आज़ाद कर सकते हो या फिर (उनसे) फिरौती ले सकते हो जब तक जंग ख़त्म न हो जाए। ऐसा ही है, और अगर अल्लाह चाहता तो वह ख़ुद उन्हें हलाक कर देता, लेकिन वह तुम्हें एक-दूसरे से आज़माना चाहता है। और जो लोग अल्लाह के रास्ते में शहीद हो गए, अल्लाह उनके कर्मों को ज़ाया नहीं करता।