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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - अल-कुरान कुरान का रहस्योद्घाटन कुरान की आयतों के रहस्योद्घाटन का कारण कई लोग थे अम्मार बिन यासिर से संबंधित छंद

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कुल श्लोक : 2
106
Q.S एक Nahl (16:106)

مَنْ كَفَرَ بِاللّٰهِ مِنْۢ بَعْدِ اِيْمَانِهٖٓ اِلَّا مَنْ اُكْرِهَ وَقَلْبُهٗ مُطْمَىِٕنٌّۢ بِالْاِيْمَانِ وَلٰكِنْ مَّنْ شَرَحَ بِالْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِّنَ اللّٰهِ ۗوَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيْمٌ

man kafara billāhi mim ba‘di īmānihī illā man ukriha wa qalbuhū muṭma'innum bil-īmāni wa lākim man syaraḥa bil-kufri ṣadran fa ‘alaihim gaḍabum minallāh(i), wa lahum ‘ażābun aẓīm(un).

जो कोई अल्लाह को नकारता है उसके बाद कि वह ईमान लाया (उस पर अल्लाह की नाराज़गी है), सिवाय उस व्यक्ति के जो मजबूर किया गया हो और उसका दिल ईमान में सुकून में हो (वह बेगुनाह है), लेकिन जो व्यक्ति कुफ्र के लिए अपना सीना खोल दे, तो उस पर अल्लाह की नाराज़गी है और उनके लिए बड़ा अज़ाब है।


28
Q.S अल Kahf (18:28)

وَاصْبِرْ نَفْسَكَ مَعَ الَّذِيْنَ يَدْعُوْنَ رَبَّهُمْ بِالْغَدٰوةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيْدُوْنَ وَجْهَهٗ وَلَا تَعْدُ عَيْنٰكَ عَنْهُمْۚ تُرِيْدُ زِيْنَةَ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۚ وَلَا تُطِعْ مَنْ اَغْفَلْنَا قَلْبَهٗ عَنْ ذِكْرِنَا وَاتَّبَعَ هَوٰىهُ وَكَانَ اَمْرُهٗ فُرُطًا

waṣbir nafsaka ma‘al-lażīna yad‘ūna rabbahum bil-gadāti wal-‘asyiyyi yurīdūna wajhahū wa lā ta‘du ‘aināka ‘anhum, turīdu zīnatal-ḥayātid-dun-yā, wa lā tuṭi‘ man agfalnā qalbahū ‘an żikrinā wattaba‘a hawāhu wa kāna amruhū furuṭā(n).

और (मुहम्मद) तुम उन लोगों के साथ सब्र करो जो अपने रब को सुबह और शाम पुकारते हैं, उसकी रज़ा की तमन्ना में; और अपनी आँखों को उनसे न फेरो, दुनिया की ज़ीनत की चाहत में; और उस शख्स की पैरवी न करो जिसके दिल को हमने अपनी याद से गाफिल कर दिया, और वह अपनी ख्वाहिशों की पैरवी करता है और उसका हाल हद से गुज़र चुका है।