اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذِيْنَ اُوْتُوْا نَصِيْبًا مِّنَ الْكِتٰبِ يُؤْمِنُوْنَ بِالْجِبْتِ وَالطَّاغُوْتِ وَيَقُوْلُوْنَ لِلَّذِيْنَ كَفَرُوْا هٰٓؤُلَاۤءِ اَهْدٰى مِنَ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا سَبِيْلًا
alam tara ilal-lażīna ūtū naṣībam minal-kitābi yu'minūna bil-jibti waṭ-ṭāgūti wa yaqūlūna lil-lażīna kafarū hā'ulā'i ahdā minal-lażīna āmanū sabīlā(n).
का रउवां ओह लोग पर विचार नइखीं कइले जेकरा के किताब (तोराह) के एगो हिस्सा दिहल गइल रहे? उ लोग जिबत अवुरी तगहुत में विश्वास करेले, अवुरी काफिर (मक्का के मुश्रिक) से कहेले कि उ लोग अपना रास्ता में मुसलमान से जादे सही बाड़े।
اُولٰۤىِٕكَ الَّذِيْنَ لَعَنَهُمُ اللّٰهُ ۗوَمَنْ يَّلْعَنِ اللّٰهُ فَلَنْ تَجِدَ لَهٗ نَصِيْرًا
ulā'ikal-lażīna la‘anahumullāh(u), wa may yal‘anillāhu falan tajida lahū naṣīrā(n).
इहे लोग ह जेकरा के अल्लाह गारी देले रहले। आ जेकरा के अल्लाह के गारी दिहल जाई ओकरा खातिर रउरा कवनो सहायक ना होखी.