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Q.S टोप (11:120)
وَكُلًّا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ اَنْۢبَاۤءِ الرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهٖ فُؤَادَكَ وَجَاۤءَكَ فِيْ هٰذِهِ الْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌ وَّذِكْرٰى لِلْمُؤْمِنِيْنَ
wa kullan naquṣṣu ‘alaika min ambā'ir-rusuli mā nuṡabbitu bihī fu'ādaka wa jā'aka fī hāżihil-ḥaqqu wa mau‘iẓatuw wa żikrā lil-mu'minīn(a).
आ प्रेरित सभक सभटा कथा, हम अहाँ सभ केँ (मुहम्मद) कहैत छी, जाहि सँ ओहि कथा सभ सँ हम सभ अहाँ सभक हृदय केँ मजबूत करी; आ ओहि मे अहाँ केँ (सब) सत्य, सलाह आ चेतावनी देल गेल अछि जे विश्वास करैत अछि |