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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Al-Qur'an Turunnya Al-Qur'an Beberapa wanita yang menjadi sebab turunnya ayat Al Qur'an Ayat yang berhubungan dengan Zainab binti Jahsy

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कुल आयत : 3
36
Q.S अल-अहजाब के ह (33:36)

وَمَا كَانَ لِمُؤْمِنٍ وَّلَا مُؤْمِنَةٍ اِذَا قَضَى اللّٰهُ وَرَسُوْلُهٗٓ اَمْرًا اَنْ يَّكُوْنَ لَهُمُ الْخِيَرَةُ مِنْ اَمْرِهِمْ ۗوَمَنْ يَّعْصِ اللّٰهَ وَرَسُوْلَهٗ فَقَدْ ضَلَّ ضَلٰلًا مُّبِيْنًاۗ

wa mā kāna limu'miniw wa lā mu'minatin iżā qaḍallāhu wa rasūluhū amran ay yakūna lahumul-khiyaratu min amrihim, wa may ya‘ṣillāha wa rasūlahū faqad ḍalla ḍalālam mubīnā(n).

आ ई मुसलमान मरद आ मुसलमान मेहरारू खातिर उचित नइखे, अगर अल्लाह आ उनकर रसूलुल्लाह कवनो फरमान तय कइले बाड़न त ओह लोग खातिर ओह लोग के मामिला के संबंध में (अउरी) विकल्प होखी. आ जे अल्लाह आ उनकर रसूलुल्लाह के आज्ञा ना माने त साँचहू ऊ भटक गइल बा, साफ गलती से.


37
Q.S अल-अहजाब के ह (33:37)

وَاِذْ تَقُوْلُ لِلَّذِيْٓ اَنْعَمَ اللّٰهُ عَلَيْهِ وَاَنْعَمْتَ عَلَيْهِ اَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَاتَّقِ اللّٰهَ وَتُخْفِيْ فِيْ نَفْسِكَ مَا اللّٰهُ مُبْدِيْهِ وَتَخْشَى النَّاسَۚ وَاللّٰهُ اَحَقُّ اَنْ تَخْشٰىهُ ۗ فَلَمَّا قَضٰى زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَرًاۗ زَوَّجْنٰكَهَا لِكَيْ لَا يَكُوْنَ عَلَى الْمُؤْمِنِيْنَ حَرَجٌ فِيْٓ اَزْوَاجِ اَدْعِيَاۤىِٕهِمْ اِذَا قَضَوْا مِنْهُنَّ وَطَرًاۗ وَكَانَ اَمْرُ اللّٰهِ مَفْعُوْلًا

wa iż taqūlu lil-lażī an‘amallāhu ‘alaihi wa an‘amta ‘alaihi amsik ‘alaika zaujaka wattaqillāha wa tukhfī fī nafsika mallāhu mubdīhi wa takhsyan-nās(a), wallāhu aḥaqqu an takhsyāh(u), falammā qaḍā zaidum minhā waṭaran zawwajnākahā likai lā yakūna ‘alal-mu'minīna ḥarajun fī azwāji ad‘iyā'ihim iżā qaḍau minhunna waṭarā(n), wa kāna amrullāhi maf‘ūlā(n).

आ (याद रखीं), जब रउआ (मुहम्मद) ओह व्यक्ति से कहनी जेकरा पर अल्लाह एहसान कइले बाड़न आ रउआ (उहो) ओकरा पर एहसान कइले बानी कि, "अपना मेहरारू के रखीं आ अल्लाह से डेराईं," जबकि रउआ अपना दिल में छिपावत रहनी कि अल्लाह जवन खुलासा करीहें, आ रउआ लोग से डेरात रहनी, भले ही अल्लाह के रउआ से डेराए के अधिका अधिकार रहे। त जब जैद अपना पत्नी खातिर आपन जरूरत खतम क देले रहले (तलाक दे देले रहले), त हमनी के आपके बियाह उनुका (जैनाब) से कईनी जा ताकि मुसलमान लोग के अपना गोद लिहल बच्चा के पत्नी से (बियाह) करे में कवनो आपत्ति ना होखे, अगर गोद लिहल बच्चा अपना पत्नी खाती आपन जरूरत पूरा क लेले रहित। आ भगवान के फरमान जरूर पूरा होई।


38
Q.S अल-अहजाब के ह (33:38)

مَا كَانَ عَلَى النَّبِيِّ مِنْ حَرَجٍ فِيْمَا فَرَضَ اللّٰهُ لَهٗ ۗسُنَّةَ اللّٰهِ فِى الَّذِيْنَ خَلَوْا مِنْ قَبْلُ ۗوَكَانَ اَمْرُ اللّٰهِ قَدَرًا مَّقْدُوْرًاۙ

mā kāna ‘alan-nabiyyi min ḥarajin fīmā faraḍallāhu lah(ū), sunnatallāhi fil-lażīna khalau min qabl(u), wa kāna amrullāhi qadaram maqdūrā(n).

नबी के एह बात पर कवनो आपत्ति ना रहे कि अल्लाह उनुका खातिर का तय कइले रहले. (अल्लाह इ तय कईले बाड़े) के अल्लाह के सुन्नत के रूप में पिछला नबी लोग के। आ भगवान के फरमान एगो अइसन फरमान ह जवन निश्चित रूप से लागू हो जाई,