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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - अल-कुरान कुरान का रहस्योद्घाटन कुरान की आयतें सामने आने का कारण कई महिलाएं थीं हफ्सा बिन्त उमर से संबंधित कविता

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कुल श्लोक : 5
1
Q.S एट-Tahrim (66:1)

يٰٓاَيُّهَا النَّبِيُّ لِمَ تُحَرِّمُ مَآ اَحَلَّ اللّٰهُ لَكَۚ تَبْتَغِيْ مَرْضَاتَ اَزْوَاجِكَۗ وَاللّٰهُ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

yā ayyuhan-nabiyyu lima tuḥarrimu mā aḥallallāhu lak(a), tabtagī marḍāta azwājik(a), wallāhu gafūrur raḥīm(un).

ऐ नबी! तुम उस चीज़ को क्यों हराम करते हो जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल की? क्या तुम अपनी बीवियों को खुश करना चाहते हो? और अल्लाह बहुत माफ करने वाला, बहुत रहम करने वाला है।


2
Q.S एट-Tahrim (66:2)

قَدْ فَرَضَ اللّٰهُ لَكُمْ تَحِلَّةَ اَيْمَانِكُمْۚ وَاللّٰهُ مَوْلٰىكُمْۚ وَهُوَ الْعَلِيْمُ الْحَكِيْمُ

qad faraḍallāhu lakum taḥillata aimānikum, wallāhu maulākum, wa huwal-‘alīmul-ḥakīm(u).

अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हारी क़समों को तोड़ने का रास्ता निर्धारित किया है। और अल्लाह तुम्हारा रब है, और वह बहुत जानने वाला, बहुत हिकमत वाला है।


3
Q.S एट-Tahrim (66:3)

وَاِذْ اَسَرَّ النَّبِيُّ اِلٰى بَعْضِ اَزْوَاجِهٖ حَدِيْثًاۚ فَلَمَّا نَبَّاَتْ بِهٖ وَاَظْهَرَهُ اللّٰهُ عَلَيْهِ عَرَّفَ بَعْضَهٗ وَاَعْرَضَ عَنْۢ بَعْضٍۚ فَلَمَّا نَبَّاَهَا بِهٖ قَالَتْ مَنْ اَنْۢبَاَكَ هٰذَاۗ قَالَ نَبَّاَنِيَ الْعَلِيْمُ الْخَبِيْرُ

wa iż asarran-nabiyyu ilā ba‘ḍi azwājihī ḥadīṡā(n), falammā nabba'at bihī wa aẓharahullāhu ‘alaihi ‘arrafa ba‘ḍahū wa a‘raḍa ‘am baḍ(in), falammā nabba'ahā bihī qālat man amba'aka hāżā, qāla nabba'aniyal-‘alīmul-khabīr(u).

और जब नबी ने अपनी एक बीवी से एक बात गुप्त रूप से कही, तो उसने वह बात (दूसरी को) बता दी, और अल्लाह ने उसे नबी को ज़ाहिर कर दिया। फिर नबी ने उसका कुछ हिस्सा बताया और कुछ हिस्से से रुक गए। तो जब उसने अपनी बीवी को यह बताया, तो वह बोली, 'यह तुम्हें किसने बताया?' उसने कहा, 'मुझे उसने बताया जो बहुत जानने वाला, बहुत खबर रखने वाला है।'


4
Q.S एट-Tahrim (66:4)

اِنْ تَتُوْبَآ اِلَى اللّٰهِ فَقَدْ صَغَتْ قُلُوْبُكُمَاۚ وَاِنْ تَظٰهَرَا عَلَيْهِ فَاِنَّ اللّٰهَ هُوَ مَوْلٰىهُ وَجِبْرِيْلُ وَصَالِحُ الْمُؤْمِنِيْنَۚ وَالْمَلٰۤىِٕكَةُ بَعْدَ ذٰلِكَ ظَهِيْرٌ

in tatūbā ilallāhi faqad ṣagat qulūbukumā, wa in taẓāharā ‘alaihi fa innallāha huwa maulāhu wa jibrīlu wa ṣāliḥul-mu'minīn(a), wal-malā'ikatu ba‘da żālika ẓahīr(un).

अगर तुम दोनों (बीवियाँ) अल्लाह की ओर तौबा करो, क्योंकि तुम्हारे दिल भटक गए हैं। और अगर तुम दोनों नबी के खिलाफ़ एक-दूसरे की मदद करोगी, तो निश्चित रूप से अल्लाह उसका मालिक है, और जिब्रील और नेक मोमिन लोग, और इसके बाद फरिश्ते उसकी मदद करने वाले हैं।


5
Q.S एट-Tahrim (66:5)

عَسٰى رَبُّهٗٓ اِنْ طَلَّقَكُنَّ اَنْ يُّبْدِلَهٗٓ اَزْوَاجًا خَيْرًا مِّنْكُنَّ مُسْلِمٰتٍ مُّؤْمِنٰتٍ قٰنِتٰتٍ تٰۤىِٕبٰتٍ عٰبِدٰتٍ سٰۤىِٕحٰتٍ ثَيِّبٰتٍ وَّاَبْكَارًا

‘asā rabbuhū in ṭallaqakunna ay yubdilahū azwājan khairam minkunna muslimātim mu'minātin qānitātin tā'ibātin ‘ābidātin sā'iḥātin ṡayyibātiw wa abkārā(n).

शायद उसका रब, अगर उसने तुम्हें तलाक़ दे दिया, तो उसे तुमसे बेहतर बीवियाँ दे दे, जो मुस्लिम, ईमान वाली, आज्ञाकारी, तौबा करने वाली, इबादत करने वाली, रोज़ा रखने वाली हों, चाहे वे पहले विवाहित हों या कुँवारी।