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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - अल-कुरान कुरान की प्रधानता कुरान पढ़ते समय मन की शांति

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कुल श्लोक : 2
111
Q.S यूसुफ (12:111)

لَقَدْ كَانَ فِيْ قَصَصِهِمْ عِبْرَةٌ لِّاُولِى الْاَلْبَابِۗ مَا كَانَ حَدِيْثًا يُّفْتَرٰى وَلٰكِنْ تَصْدِيْقَ الَّذِيْ بَيْنَ يَدَيْهِ وَتَفْصِيْلَ كُلِّ شَيْءٍ وَّهُدًى وَّرَحْمَةً لِّقَوْمٍ يُّؤْمِنُوْنَ ࣖ

laqad kāna fī qaṣaṣihim ‘ibratul li'ulil-albāb(i), mā kāna ḥadīṡay yuftarā wa lākin taṣdīqal-lażī baina yadaihi wa tafṣīla kulli syai'iw wa hudaw wa raḥmatal liqaumiy yu'minūn(a).

निश्चित रूप से उनकी कहानियों में अक्ल वालों के लिए इबरत है। (अल-क़ुरआन) कोई बनाई हुई कहानी नहीं है, बल्कि इससे पहले की किताबों की तस्दीक़ करता है, हर चीज़ को वाज़eh करता है, और ईमान लाने वालों के लिए हिदायत और रहमत है।


28
Q.S अर-रअद (13:28)

الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَتَطْمَىِٕنُّ قُلُوْبُهُمْ بِذِكْرِ اللّٰهِ ۗ اَلَا بِذِكْرِ اللّٰهِ تَطْمَىِٕنُّ الْقُلُوْبُ ۗ

al-lażīna āmanū wa taṭma'innu qulūbuhum biżikrillāh(i), alā biżikrillāhi taṭma'innul-qulūb(u).

और जिसने उसकी तरफ रुज़ू की उसे अपनी तरफ पहुँचने की राह दिखाता है (ये) वह लोग हैं जिन्होंने ईमान कुबूल किया और उनके दिलों को ख़ुदा की चाह से तसल्ली हुआ करती है