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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - नैतिकता महान नैतिकता अच्छा करो मेहमाननवाज़ी रिश्ता तोड़ने वाले का पाप

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कुल श्लोक : 4
27
Q.S अल Baqarah (2:27)

الَّذِيْنَ يَنْقُضُوْنَ عَهْدَ اللّٰهِ مِنْۢ بَعْدِ مِيْثَاقِهٖۖ وَيَقْطَعُوْنَ مَآ اَمَرَ اللّٰهُ بِهٖٓ اَنْ يُّوْصَلَ وَيُفْسِدُوْنَ فِى الْاَرْضِۗ اُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْخٰسِرُوْنَ

allażīna yanquḍūna ‘ahdallāhi mim ba‘di mīṡāqih(ī), wa yaqṭa‘ūna mā amarallāhu bihī ay yūṣala wa yufsidūna fil-arḍ(i), ulā'ika humul-khāsirūn(a).

(अर्थात) वे लोग जो अल्लाह के साथ किए गए वादे को तोड़ते हैं, और जो अल्लाह ने जोड़ने का हुक्म दिया उसे काटते हैं, और धरती पर बिगाड़ करते हैं। वही लोग घाटे में हैं।


25
Q.S अर-रअद (13:25)

وَالَّذِيْنَ يَنْقُضُوْنَ عَهْدَ اللّٰهِ مِنْ ۢ بَعْدِ مِيْثَاقِهٖ وَيَقْطَعُوْنَ مَآ اَمَرَ اللّٰهُ بِهٖٓ اَنْ يُّوْصَلَ وَيُفْسِدُوْنَ فِى الْاَرْضِۙ اُولٰۤىِٕكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوْۤءُ الدَّارِ

wal-lażīna yanquḍūna ‘ahdallāhi mim ba‘di mīṡāqihī wa yaqṭa‘ūna mā amarallāhu bihī ay yūṣala wa yufsidūna fil-arḍ(i), ulā'ika lahumul-la‘natu wa lahum sū'ud-dār(i).

और जो लोग ख़ुदा से एहद व पैमान को पक्का करने के बाद तोड़ डालते हैं और जिन (तालुकात बाहमी) के क़ायम रखने का ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन्हें क़तआ (तोड़ते) करते हैं और रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाते फिरते हैं ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए लानत है और ऐसे ही लोगों के वास्ते बड़ा घर (जहन्नुम) है


23
Q.S मुहम्मद (47:23)

اُولٰۤىِٕكَ الَّذِيْنَ لَعَنَهُمُ اللّٰهُ فَاَصَمَّهُمْ وَاَعْمٰٓى اَبْصَارَهُمْ

ulā'ikal-lażīna la‘anahumullāhu fa aṣammahum wa a‘mā abṣārahum.

यही वे लोग हैं जिन पर अल्लाह ने लानत की; फिर उसने उनकी सुनने की ताक़त छीन ली और उनकी नज़र को अंधा कर दिया।


25
Q.S कफ़ (50:25)

مَنَّاعٍ لِّلْخَيْرِ مُعْتَدٍ مُّرِيْبٍۙ

mannā‘il lil-khairi mu‘tadim murīb(in).

जो बहुत अच्छाई करने से रुकता था, हद से आगे बढ़ता था और शक में पड़ता था,