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Q.S अल इस्रा (17:33)
وَلَا تَقْتُلُوا النَّفْسَ الَّتِيْ حَرَّمَ اللّٰهُ اِلَّا بِالْحَقِّۗ وَمَنْ قُتِلَ مَظْلُوْمًا فَقَدْ جَعَلْنَا لِوَلِيِّهٖ سُلْطٰنًا فَلَا يُسْرِفْ فِّى الْقَتْلِۗ اِنَّهٗ كَانَ مَنْصُوْرًا
wa lā taqtulun-nafsal-latī ḥarramallāhu illā bil-ḥaqq(i), wa man qutila maẓlūman faqad ja‘alnā liwaliyyihī sulṭānan falā yusrif fil-qatl(i), innahū kāna manṣūrā(n).
आ एहन लोक के नहि मारू जिनका अल्लाह मना क देने छथि, सिवाय कोनो वैध (कारण) के। आ जकरा अन्यायपूर्वक मारल जाइत छैक, तखन सत्ते, हम ओकर रक्षक केँ अधिकार देने छी, मुदा ओकर रक्षक हत्या मे सीमा सँ बेसी नहि हो। सत्ते, ओएह छथि जिनका मदद भेटैत छनि।