وَاَعِدُّوْا لَهُمْ مَّا اسْتَطَعْتُمْ مِّنْ قُوَّةٍ وَّمِنْ رِّبَاطِ الْخَيْلِ تُرْهِبُوْنَ بِهٖ عَدُوَّ اللّٰهِ وَعَدُوَّكُمْ وَاٰخَرِيْنَ مِنْ دُوْنِهِمْۚ لَا تَعْلَمُوْنَهُمْۚ اَللّٰهُ يَعْلَمُهُمْۗ وَمَا تُنْفِقُوْا مِنْ شَيْءٍ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ يُوَفَّ اِلَيْكُمْ وَاَنْتُمْ لَا تُظْلَمُوْنَ
wa a‘iddū lahum mastaṭa‘tum min quwwatiw wa mir ribāṭil-khaili turhibūna bihī ‘aduwwallāhi wa ‘aduwwakum wa ākharīna min dūnihim, lā ta‘lamūnahum, allāhu ya‘lamuhum, wa mā tunfiqū min syai'in fī sabīlillāhi yuwaffa ilaikum wa antum lā tuẓlamūn(a).
आ अपना लगे जवन ताकत बा आ घुड़सवारन से ओह लोग के सामना करे के पूरा क्षमता से तइयारी करीं जे अल्लाह के दुश्मनन, रउरा दुश्मनन आ ओह लोग के अलावा दोसरा लोग के रोक सके जिनका के रउरा नइखीं जानत; लेकिन अल्लाह एकरा के जानत बाड़े। अल्लाह के राह में जवन भी खर्चा करब ओकरा के जरूर पर्याप्त रूप से चुकावल जाई अवुरी आपके संगे कवनो अन्याय (हानि) ना होई।