इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ पैगंबर और प्रेरित (विश्वास का स्तंभ संख्या 4) नबियों की कहानी जो स्त्रियाँ अच्छी नहीं थीं, वे पश्चात्ताप करने लगीं बालकिस (सबा की रानी)

श्लोक खोज परिणाम :
कुल श्लोक : 3
23
Q.S अन-नमल (27:23)

اِنِّيْ وَجَدْتُّ امْرَاَةً تَمْلِكُهُمْ وَاُوْتِيَتْ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ وَّلَهَا عَرْشٌ عَظِيْمٌ

innī wajattumra'atan tamlikuhum wa ūtiyat min kulli syai'iw wa lahā ‘arsyun ‘aẓīm(un).

मैंने एक औरत को पाया जो उन पर हुकूमत करती है, और उसे हर चीज़ दी गई और उसके पास एक बड़ा तख़्त है।'


24
Q.S अन-नमल (27:24)

وَجَدْتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُوْنَ لِلشَّمْسِ مِنْ دُوْنِ اللّٰهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطٰنُ اَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيْلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُوْنَۙ

wajattuhā wa qaumahā yasjudūna lisy-syamsi min dūnillāhi wa zayyana lahumusy-syaiṭānu a‘mālahum fa ṣaddahum ‘anis-sabīli fahum lā yahtadūn(a).

मैंने उसे और उसकी क़ौम को अल्लाह के सिवा सूरज की इबादत करते पाया; और शैतान ने उनके (बुरे) कामों को उनके लिए ख़ूबसूरत कर दिया, इस तरह उसने उन्हें (अल्लाह के) रास्ते से रोक दिया, तो वे हिदायत नहीं पाते,


44
Q.S अन-नमल (27:44)

قِيْلَ لَهَا ادْخُلِى الصَّرْحَۚ فَلَمَّا رَاَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةً وَّكَشَفَتْ عَنْ سَاقَيْهَاۗ قَالَ اِنَّهٗ صَرْحٌ مُّمَرَّدٌ مِّنْ قَوَارِيْرَ ەۗ قَالَتْ رَبِّ اِنِّيْ ظَلَمْتُ نَفْسِيْ وَاَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمٰنَ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِيْنَ ࣖ

qīla lahadkhuliṣ-ṣarḥ(a), falammā ra'athu ḥasibathu lujjataw wa kasyafat ‘an sāqaihā, qāla innahū ṣarḥum mumarradum min qawārīr(a), qālat rabbi innī ẓalamtu nafsī wa aslamtu ma‘a sulaimāna lillāhi rabbil-‘ālamīn(a).

उससे कहा गया, 'महल में दाख़िल हो।' तो जब उसने (महल का फ़र्श) देखा, उसे बड़ा तालाब समझा, और उसने अपनी पिंडलियाँ खोल दीं। उसने (सुलेमान ने) कहा, 'यह तो बस काँच से मढ़ा हुआ महल है।' उसने (बल्क़ीस ने) कहा, 'ऐ मेरे रब, मैंने अपने आप पर ज़ुल्म किया। मैं सुलेमान के साथ अल्लाह, सारे जहानों के रब, के सामने सर झुकाती हूँ।'