وَاَنْكِحُوا الْاَيَامٰى مِنْكُمْ وَالصّٰلِحِيْنَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَاِمَاۤىِٕكُمْۗ اِنْ يَّكُوْنُوْا فُقَرَاۤءَ يُغْنِهِمُ اللّٰهُ مِنْ فَضْلِهٖۗ وَاللّٰهُ وَاسِعٌ عَلِيْمٌ
wa ankiḥul-ayāmā minkum waṣ-ṣāliḥīna min ‘ibādikum wa imā'ikum, iy yakūnū fuqarā'a yugnihimullāhu min faḍlih(ī), wallāhu wāsi‘un ‘alīm(un).
और तुममें से जो लोग कुंवारे हैं, उन्हें और तुम्हारे गुलामों और गुलाम औरतों में से जो (निकाह के) लायक हैं, उनका निकाह करो। अगर वे गरीब हैं, तो अल्लाह अपनी मेहरबानी से उन्हें समृद्ध करेगा। और अल्लाह बहुत विस्तार देने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
وَمِنْ اٰيٰتِهٖٓ اَنْ خَلَقَ لَكُمْ مِّنْ اَنْفُسِكُمْ اَزْوَاجًا لِّتَسْكُنُوْٓا اِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُمْ مَّوَدَّةً وَّرَحْمَةً ۗاِنَّ فِيْ ذٰلِكَ لَاٰيٰتٍ لِّقَوْمٍ يَّتَفَكَّرُوْنَ
wa min āyātihī an khalaqa lakum min anfusikum azwājal litaskunū ilaihā wa ja‘ala bainakum mawaddataw wa raḥmah(tan), inna fī żālika la'āyātil liqaumiy yatafakkarūn(a).
और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही तरह से जोड़े बनाए, ताकि तुम उनके पास सुकून पाओ और उसने तुम्हारे बीच मोहब्बत और रहम पैदा किया। बेशक, इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ हैं जो ग़ौर करते हैं।