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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - कब्र क्षेत्र आलम बरज़ख, अल मुमिनुन 100

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कुल श्लोक : 2
99
Q.S अल-Mu'minun (23:99)

حَتّٰىٓ اِذَا جَاۤءَ اَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ رَبِّ ارْجِعُوْنِ ۙ

Ḥattā iżā jā'a aḥadahumul-mautu qāla rabbirji‘ūn(i).

(काफिरों की हालत ऐसी है कि) जब तक उनमें से किसी के पास मौत न आ जाए, वह कहता है, 'ऐ मेरे रब! मुझे (दुनिया में) वापस भेज दे,


100
Q.S अल-Mu'minun (23:100)

لَعَلِّيْٓ اَعْمَلُ صَالِحًا فِيْمَا تَرَكْتُ كَلَّا ۗاِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَاۤىِٕلُهَاۗ وَمِنْ وَّرَاۤىِٕهِمْ بَرْزَخٌ اِلٰى يَوْمِ يُبْعَثُوْنَ

la‘allī a‘malu ṣāliḥan fīmā taraktu kallā, innahā kalimatun huwa qā'iluhā, wa miw warā'ihim barzakhun ilā yaumi yub‘aṡūn(a).

ताकि मैं वह नेक काम कर सकूँ जो मैंने छोड़ दिया।' हरगिज़ नहीं! यह तो बस उसकी बात है जो वह कहता है। और उनके सामने एक बरज़ख (रुकावट) है जब तक कि वे दोबारा न उठाए जाएँ।