ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا لِّلَّذِيْنَ كَفَرُوا امْرَاَتَ نُوْحٍ وَّامْرَاَتَ لُوْطٍۗ كَانَتَا تَحْتَ عَبْدَيْنِ مِنْ عِبَادِنَا صَالِحَيْنِ فَخَانَتٰهُمَا فَلَمْ يُغْنِيَا عَنْهُمَا مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔا وَّقِيْلَ ادْخُلَا النَّارَ مَعَ الدّٰخِلِيْنَ
Ḍaraballāhu maṡalal lil-lażīna kafarumra'ata nūḥiw wamra'ata lūṭ(in), kānatā taḥta ‘abdaini min ‘ibādinā ṣāliḥaini fa khānatāhumā falam yugniyā ‘anhumā minallāhi syai'aw wa qīladkhulan-nāra ma‘ad-dākhilīn(a).
अल्लाह काफिरन, नूह के पत्नी अवुरी लूत के पत्नी खाती एगो दृष्टांत बनवले। दुनु हमनी के सेवकन में दू गो पुण्य सेवकन के देखरेख में बा; तब दुनो पत्नी अपना दुनो पति के धोखा दे दिहली, लेकिन दुनो पति अल्लाह के (अत्याचार) से तनको मदद ना क पवले; आ कहल गइल (दुनो मेहरारू से) "तू दुनु जाना (नरक) जाए वाला लोग के साथे नरक में जाइब।"