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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आस्था के 6 स्तंभ पैगंबर और प्रेरित (विश्वास का स्तंभ संख्या 4) नबियों की कहानी पुराने ज़माने के काफ़िर फिरौन

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कुल श्लोक : 4
90
Q.S जोनाह (10:90)

۞ وَجَاوَزْنَا بِبَنِيْٓ اِسْرَاۤءِيْلَ الْبَحْرَ فَاَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ وَجُنُوْدُهٗ بَغْيًا وَّعَدْوًا ۗحَتّٰىٓ اِذَآ اَدْرَكَهُ الْغَرَقُ قَالَ اٰمَنْتُ اَنَّهٗ لَآ اِلٰهَ اِلَّا الَّذِيْٓ اٰمَنَتْ بِهٖ بَنُوْٓا اِسْرَاۤءِيْلَ وَاَنَا۠ مِنَ الْمُسْلِمِيْنَ

wa jāwaznā bibanī isrā'īlal-baḥra fa atba‘ahum fir‘aunu wa junūduhū bagyaw wa ‘adwā(n), ḥattā iżā adrakahul-garaqu qāla āmantu annahū lā ilāha illal-lażī āmanat bihī banū isrā'īla wa ana minal-muslimīn(a).

और हमने बनी इसराइल को समुद्र पार कराया, फिर फ़िरऔन और उसकी सेना ने उनका पीछा किया, ज़ुल्म और अत्याचार के लिए। यहाँ तक कि जब फ़िरऔन डूबने वाला था, उसने कहा, 'मैं विश्वास करता हूँ कि कोई ईश्वर नहीं है सिवाय उस ईश्वर के जिस पर बनी इसराइल ने विश्वास किया, और मैं मुस्लिमों (आत्मसमर्पण करने वालों) में से हूँ।'


91
Q.S जोनाह (10:91)

اٰۤلْـٰٔنَ وَقَدْ عَصَيْتَ قَبْلُ وَكُنْتَ مِنَ الْمُفْسِدِيْنَ

Āl'āna wa qad ‘aṣaita qablu wa kunta minal-mufsidīn(a).

(कहा गया), 'क्या अब (तुम ईमान लाते हो), जबकि तुमने पहले से अवज्ञा की थी, और तुम नुकसान पहुँचाने वालों में से थे?'


92
Q.S जोनाह (10:92)

فَالْيَوْمَ نُنَجِّيْكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُوْنَ لِمَنْ خَلْفَكَ اٰيَةً ۗوَاِنَّ كَثِيْرًا مِّنَ النَّاسِ عَنْ اٰيٰتِنَا لَغٰفِلُوْنَ ࣖ

fal yauma nunajjīka bibadanika litakūna liman khalfaka āyah(tan), wa inna kaṡīram minan-nāsi ‘an āyātinā lagāfilūn(a).

तो आज हम तुम्हारी देह को बचा लेंगे ताकि तुम उन लोगों के लिए एक निशानी बनो जो तुम्हारे बाद आएँगे, लेकिन अधिकांश लोग हमारी निशानियों की उपेक्षा करते हैं।


38
Q.S अल-क़सस (28:38)

وَقَالَ فِرْعَوْنُ يٰٓاَيُّهَا الْمَلَاُ مَا عَلِمْتُ لَكُمْ مِّنْ اِلٰهٍ غَيْرِيْۚ فَاَوْقِدْ لِيْ يٰهَامٰنُ عَلَى الطِّيْنِ فَاجْعَلْ لِّيْ صَرْحًا لَّعَلِّيْٓ اَطَّلِعُ اِلٰٓى اِلٰهِ مُوْسٰىۙ وَاِنِّيْ لَاَظُنُّهٗ مِنَ الْكٰذِبِيْنَ

wa qāla fir‘aunu yā ayyuhal-mala'u mā ‘alimtu lakum min ilāhin gairī, fa'auqid lī yā hāmānu ‘alaṭ-ṭīni faj‘al lī ṣarḥal la‘allī aṭṭali‘u ilā ilāhi mūsā, wa innī la'aẓunnuhū minal-kāżibīn(a).

और फ़िरऔन ने कहा, 'ऐ मेरे सरदारों! मुझे तुम्हारे लिए मेरे सिवा कोई ख़ुदा नहीं मालूम। तो ऐ हामान, मेरे लिए मिट्टी जला (ईंटें बना), फिर मेरे लिए एक ऊँचा बुर्ज बना ताकि मैं मूसा के ख़ुदा को देख सकूँ, और मुझे यक़ीन है कि वह झूठा है।'