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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - नैतिकता और शिष्टाचार नैतिकता महान नैतिकता शर्म करो

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कुल श्लोक : 1
25
Q.S अल-क़सस (28:25)

فَجَاۤءَتْهُ اِحْدٰىهُمَا تَمْشِيْ عَلَى اسْتِحْيَاۤءٍ ۖقَالَتْ اِنَّ اَبِيْ يَدْعُوْكَ لِيَجْزِيَكَ اَجْرَ مَا سَقَيْتَ لَنَاۗ فَلَمَّا جَاۤءَهٗ وَقَصَّ عَلَيْهِ الْقَصَصَۙ قَالَ لَا تَخَفْۗ نَجَوْتَ مِنَ الْقَوْمِ الظّٰلِمِيْنَ

fajā'athu iḥdāhumā tamsyī ‘alastiḥyā'(in), qālat inna abī yad‘ūka liyajziyaka ajra mā saqaita lanā, falammā jā'ahū wa qaṣṣa ‘alaihil-qaṣaṣ(a), qāla lā takhaf, najauta minal-qaumiẓ-ẓālimīn(a).

फिर उन दोनों में से एक औरत उसके पास शर्माते हुए चली आई, उसने कहा, 'मेरे बाप तुझे बुलाते हैं ताकि तुझे उस (ख़ैर) का बदला दें जो तूने हमारे (जानवरों को) पानी पिलाया।' जब (मूसा) उनके बाप के पास आया और उसने उन्हें अपनी कहानी सुनाई, उसने कहा, 'डर मत! तू उन ज़ालिम लोगों से बच गया।'