इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - इसलाम इस्लाम का रद्द होना मुस्लिम उम्माह के पतन का कारण बनता है मृतक सुन नहीं सकता इसलिए उससे प्रार्थना नहीं कर सकता सूरह अन-नमल में ईश्वर के वचन की व्याख्या: 80

श्लोक खोज परिणाम :
कुल श्लोक : 3
80
Q.S अन-नमल (27:80)

اِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتٰى وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاۤءَ اِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِيْنَ

innaka lā tusmi‘ul-mautā wa lā tusmi‘uṣ-ṣummad-du‘ā'a iżā wallau mudbirīn(a).

बेशक, तू मरे हुए को सुनाने वाला नहीं और न बहरों को अपनी पुकार सुना सकता है, जब वे पीठ फेर लेते हैं।


52
Q.S अर-रम (30:52)

فَاِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتٰى وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاۤءَ اِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِيْنَ

fa innaka lā tusmi‘ul-mautā wa lā tusmi‘uṣ-ṣummad-du‘ā'a iżā wallau mudbirīn(a).

तो बेशक, तू मुर्दों को नहीं सुनवा सकता, और न बहरों को बुलावा सुनवा सकता है, जब वे पीठ फेर लेते हैं।


22
Q.S फातिर (35:22)

وَمَا يَسْتَوِى الْاَحْيَاۤءُ وَلَا الْاَمْوَاتُۗ اِنَّ اللّٰهَ يُسْمِعُ مَنْ يَّشَاۤءُ ۚوَمَآ اَنْتَ بِمُسْمِعٍ مَّنْ فِى الْقُبُوْرِ

wa mā yastawil-aḥyā'u wa lal-amwāt(u), innallāha yusmi‘u may yasyā'(u), wa mā anta bimusmi‘im man fil-qubūr(i).

और न ज़िंदगी और मौत एकसमान है। निश्चित रूप से, अल्लाह जिसे चाहता है सुनाता है और तू (मुहम्मद) कब्रों में रहने वालों को सुनाने की ताक़त नहीं रखता।