اِذْ تَسْتَغِيْثُوْنَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ اَنِّيْ مُمِدُّكُمْ بِاَلْفٍ مِّنَ الْمَلٰۤىِٕكَةِ مُرْدِفِيْنَ
iż tastagīṡūna rabbakum fastajāba lakum annī mumiddukum bi'alfim minal-malā'ikati murdifīn(a).
(याद करो) जब तुम अपने रब से सहायता माँग रहे थे, तो उसने तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार की, 'निश्चय ही, मैं तुम्हारी सहायता के लिए एक हज़ार फ़रिश्ते भेजूँगा जो एक के बाद एक आएँगे।'
وَمَا جَعَلَهُ اللّٰهُ اِلَّا بُشْرٰى وَلِتَطْمَىِٕنَّ بِهٖ قُلُوْبُكُمْۗ وَمَا النَّصْرُ اِلَّا مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ ۗاِنَّ اللّٰهَ عَزِيْزٌ حَكِيْمٌ ࣖ
wa mā ja‘alahullāhu illā busyrā wa litaṭma'inna bihī qulūbukum, wa man-naṡru illā min ‘indillāh(i), innallāha ‘azīzun ḥakīm(un).
और अल्लाह ने ऐसा केवल इसलिए किया ताकि यह तुम्हारे लिए ख़ुशख़बरी हो और तुम्हारे दिल इससे शांति पाएँ। और जीत केवल अल्लाह की ओर से है। निश्चय ही, अल्लाह बहुत शक्तिशाली, बहुत बुद्धिमान है।
اِذْ يُوْحِيْ رَبُّكَ اِلَى الْمَلٰۤىِٕكَةِ اَنِّيْ مَعَكُمْ فَثَبِّتُوا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْاۗ سَاُلْقِيْ فِيْ قُلُوْبِ الَّذِيْنَ كَفَرُوا الرُّعْبَ فَاضْرِبُوْا فَوْقَ الْاَعْنَاقِ وَاضْرِبُوْا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍۗ
iż yūḥī rabbuka ilal-malā'ikati annī ma‘akum fa ṡabbitul-lażīna āmanū, sa'ulqī fī qulūbil-lażīna kafarur-ru‘ba faḍribū fauqal-a‘nāqi waḍribū minhum kulla banān(in).
(याद करो) जब तुम्हारा रब फ़रिश्तों को वह्य भेज रहा था, 'निश्चय ही मैं तुम्हारे साथ हूँ, तो ईमान वालों को मज़बूत करो। मैं काफ़िरों के दिलों में डर डालूँगा। तो उनके गले के ऊपर प्रहार करो और उनके हर उँगली के सिरे पर प्रहार करो।'