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Q.S अत-तवबाह के बा (9:18)
اِنَّمَا يَعْمُرُ مَسٰجِدَ اللّٰهِ مَنْ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَاَقَامَ الصَّلٰوةَ وَاٰتَى الزَّكٰوةَ وَلَمْ يَخْشَ اِلَّا اللّٰهَ ۗفَعَسٰٓى اُولٰۤىِٕكَ اَنْ يَّكُوْنُوْا مِنَ الْمُهْتَدِيْنَ
innamā ya‘muru masājidallāhi man āmana billāhi wal-yaumil-ākhiri wa aqāmaṣ-ṣalāta wa ātaz-zakāta wa lam yakhsya illallāh(a), fa ‘asā ulā'ika ay yakūnū minal-muhtadīn(a).
दरअसल, अल्लाह के मस्जिद में समृद्धि करे वाला लोग खाली उहे होला जे अल्लाह आ आखरी दिन पर विश्वास करेला, आ (अभी भी) नमाज करेला, जकात करेला आ अल्लाह के अलावा (कवनो चीज से) ना डेराला। त उम्मीद बा कि मार्गदर्शन पावे वाला लोग में उ लोग भी शामिल होईहे।