يٰٓاَيُّهَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْٓا اَطِيْعُوا اللّٰهَ وَاَطِيْعُوا الرَّسُوْلَ وَاُولِى الْاَمْرِ مِنْكُمْۚ فَاِنْ تَنَازَعْتُمْ فِيْ شَيْءٍ فَرُدُّوْهُ اِلَى اللّٰهِ وَالرَّسُوْلِ اِنْ كُنْتُمْ تُؤْمِنُوْنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِۗ ذٰلِكَ خَيْرٌ وَّاَحْسَنُ تَأْوِيْلًا ࣖ
yā ayyuhal-lażīna āmanū aṭī‘ullāha wa aṭī‘ur-rasūla wa ulil-amri minkum, fa in tanāza‘tum fī syai'in fa ruddhu ilallāhi war-rasūli in kuntum tu'minūna billāhi wal-yaumil-ākhir(i), żālika khairuw wa aḥsanu ta'wīlā(n).
हे विश्वास करे वाला लोग! अल्लाह के बात करीं आ रसूलुल्लाह (मुहम्मद) के बात करीं, आ तोहनी में से उलील अमरी (अधिकार) के बात करीं। फेर अगर रउरा कवनो बात पर मतभेद बा त ओकरा के अल्लाह (कुरान) आ रसूलुल्लाह (उनकर सुन्नत) के लगे वापस कर दीं, अगर रउरा अल्लाह आ आखरी दिन पर विश्वास करीं. उहे जादा जरूरी बा (रउरा खातिर) अवुरी एकर नतीजा बेहतर बा।