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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)



विषय - Islam Pembatal Keislaman Yang Menyebabkan Kemunduran Umat Islam Kebid'ahan Keutamaan Menghindari Perkara yang Diada-adakan (Al-Muhdatsat)

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3
Q.S अल-मैदा (5:3)

حُرِّمَتْ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةُ وَالدَّمُ وَلَحْمُ الْخِنْزِيْرِ وَمَآ اُهِلَّ لِغَيْرِ اللّٰهِ بِهٖ وَالْمُنْخَنِقَةُ وَالْمَوْقُوْذَةُ وَالْمُتَرَدِّيَةُ وَالنَّطِيْحَةُ وَمَآ اَكَلَ السَّبُعُ اِلَّا مَا ذَكَّيْتُمْۗ وَمَا ذُبِحَ عَلَى النُّصُبِ وَاَنْ تَسْتَقْسِمُوْا بِالْاَزْلَامِۗ ذٰلِكُمْ فِسْقٌۗ اَلْيَوْمَ يَىِٕسَ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْ دِيْنِكُمْ فَلَا تَخْشَوْهُمْ وَاخْشَوْنِۗ اَلْيَوْمَ اَكْمَلْتُ لَكُمْ دِيْنَكُمْ وَاَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِيْ وَرَضِيْتُ لَكُمُ الْاِسْلَامَ دِيْنًاۗ فَمَنِ اضْطُرَّ فِيْ مَخْمَصَةٍ غَيْرَ مُتَجَانِفٍ لِّاِثْمٍۙ فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ

Ḥurrimat ‘alaikumul-maitatu wad-damu wa laḥmul-khinzīri wa mā uhilla ligairillāhi bihī wal-munkhaniqatu wal-mauqūżatu wal-mutaraddiyatu wan-naṭīḥatu wa mā akalas-sabu‘u illā mā żakkaitum, wa mā żubiḥa ‘alan-nuṣubi wa an tastaqsimū bil-azlām(i), żālikum fisq(un), al-yauma ya'isal-lażīna kafarū min dīnikum falā takhsyauhum wakhsyaun(i), al-yauma akmaltu lakum dīnakum wa atmamtu ‘alaikum ni‘matī wa raḍītu lakumul-islāma dīnā(n), fa maniḍṭurra fī makhmaṣatin gaira mutajānifil li'iṡm(in), fa innallāha gafūrur raḥīm(un).

थारै वास्तै लाश, खून, सूअर रो मांस अर अल्लाह रै नाम सूं नीं काटियोड़ा जानवरां रो (मांस) खाणो मना है, जिका गला घोट दिया गया है, जिका मार दिया गया है, जिका गिरग्या है, जिका काट दिया गया है अर जिका जंगली जानवरां रै द्वारा फाड़ दिया गया है, सिवाय बां रै जिणनै काटबा रो थारै कनै बगत है। अर (इणरै अलावा) जिका मूरतियां रै वास्तै वध करिया जावै है। अर (यो भी मना है) अजलम (तीर) सूं घणी सारी किस्मत खींचणी, (क्यूंकै) ओ एक बुराई है। आज काफिरां थारै धरम नै हराबा री आस छोड़ दी है, सो थै बां सूं मत डरो, पण म्हारै सूं डरो। आज म्हैं थारै वास्तै थारो धरम सिद्ध कर दियो है, अर थारै वास्तै आपरी आशीर्वाद पूरी कर दी है, अर म्हैं इस्लाम नै थारो धरम मान लियो है। पण जिको भी भूख रै कारण मजबूर हुवै है, पाप करण री इच्छा रै कारण नीं, तो वाकई अल्लाह माफ करण आळो अर दयालु है।


33
Q.S अल-अरफ (7:33)

قُلْ اِنَّمَا حَرَّمَ رَبِّيَ الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَالْاِثْمَ وَالْبَغْيَ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَاَنْ تُشْرِكُوْا بِاللّٰهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهٖ سُلْطٰنًا وَّاَنْ تَقُوْلُوْا عَلَى اللّٰهِ مَا لَا تَعْلَمُوْنَ

qul innamā ḥarrama rabbiyal-fawāḥisya mā ẓahara minhā wa mā baṭana wal-iṡma wal-bagya bigairil-ḥaqqi wa an tusyrikū billāhi mā lam yunazzil bihī sulṭānaw wa an taqūlū ‘alallāhi mā lā ta‘lamūn(a).

(मुहम्मद) कैवो, "म्हारो प्रभु फगत सगळा दिखाई देवण आळा अर छुपायोड़ा नीच कामां, पापपूर्ण कामां, बिना किणी वैध कारण रै अन्यायपूर्ण कामां सूं मना करै है, अर थानै किणी चीज रै साथै अल्लाह रै साथै साथी बणाबा सूं मना करै है, जदकै उण इण वास्तै कोई कारण नीं बतायो है, अर थानै अल्लाह रै बारै में बात करण सूं मना करै है जिणनै थै नीं जाणौ हो।"