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Q.S अज-जुमार के ह (39:68)
وَنُفِخَ فِى الصُّوْرِ فَصَعِقَ مَنْ فِى السَّمٰوٰتِ وَمَنْ فِى الْاَرْضِ اِلَّا مَنْ شَاۤءَ اللّٰهُ ۗ ثُمَّ نُفِخَ فِيْهِ اُخْرٰى فَاِذَا هُمْ قِيَامٌ يَّنْظُرُوْنَ
wa nufikha fiṣ-ṣūri faṣa‘iqa man fis-samāwāti wa man fil-arḍi illā man syā'allāh(u), ṡumma nufikha fīhi ukhrā fa'iżā hum qiyāmuy yanẓurūn(a).
आ तुरही बजावल गइल आ आकाश आ धरती के सगरी (जीव) मर गइल सिवाय ओह लोग के जेकरा के अल्लाह चाहत रहले. फेर एक बेर फेरु (तुरही) बजावल गईल फिर तुरंत उ लोग (अपना कब्र से) (भगवान के फैसला के) इंतजार करत उठ गईले।