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इस्लाम अल-हक: कुरान अर हदीस
(साचो इस्लाम)



विषय - 6 Rukun Iman Hari Kiamat (rukun iman no.5) Tanda Kiamat Bermegah-megahan dalam membangun masjid

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कुल आयत : 3
18
Q.S अट-तवबाह (9:18)

اِنَّمَا يَعْمُرُ مَسٰجِدَ اللّٰهِ مَنْ اٰمَنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ وَاَقَامَ الصَّلٰوةَ وَاٰتَى الزَّكٰوةَ وَلَمْ يَخْشَ اِلَّا اللّٰهَ ۗفَعَسٰٓى اُولٰۤىِٕكَ اَنْ يَّكُوْنُوْا مِنَ الْمُهْتَدِيْنَ

innamā ya‘muru masājidallāhi man āmana billāhi wal-yaumil-ākhiri wa aqāmaṣ-ṣalāta wa ātaz-zakāta wa lam yakhsya illallāh(a), fa ‘asā ulā'ika ay yakūnū minal-muhtadīn(a).

साची, अल्लाह री मस्जिद मांय समृद्ध होवण आळा लोग फगत वै ई है जका अल्लाह अर आखरी दिन माथै विस्वास करै है, अर (अबै भी) नमाज पढ़ै है, जकात देवै है अर अल्लाह रै अलावा (किणी भी चीज सूं) नीं डरै है। तो उम्मीद है कै वै मार्गदर्शन पाबाळा लोगां मांय सूं एक हुवैला।


107
Q.S अट-तवबाह (9:107)

وَالَّذِيْنَ اتَّخَذُوْا مَسْجِدًا ضِرَارًا وَّكُفْرًا وَّتَفْرِيْقًاۢ بَيْنَ الْمُؤْمِنِيْنَ وَاِرْصَادًا لِّمَنْ حَارَبَ اللّٰهَ وَرَسُوْلَهٗ مِنْ قَبْلُ ۗوَلَيَحْلِفُنَّ اِنْ اَرَدْنَآ اِلَّا الْحُسْنٰىۗ وَاللّٰهُ يَشْهَدُ اِنَّهُمْ لَكٰذِبُوْنَ

wal-lażīnattakhażū masjidan ḍirāraw wa kufraw wa tafrīqam bainal-mu'minīna wa irṣādal liman ḥāraballāha wa rasūlahū min qabl(u), wa layaḥlifunna in aradnā illal-ḥusnā, wallāhu yasyhadu innahum lakāżibūn(a).

अर (पाखंडियां रै मांय) अस्या लोग है जका मस्जिद बणावै है ताकि (मुमिनां माथै) आफत पैदा कर सकै, काफिर कर सकै अर मुमिनां नै फूट सकै अर बां लोगां रै आगमन री उडीक कर सकै जिका लाम्बै बगत सूं अल्लाह अर उणरै रसूल सूं लड़ रैया है। वे स्पष्ट रूप सूं कसम खावै है, "म्हानै फगत भलाई चाइजै।" अर अल्लाह गवाह है कै वे झूठा है (आपरी कसम रै मांय)।


109
Q.S अट-तवबाह (9:109)

اَفَمَنْ اَسَّسَ بُنْيَانَهٗ عَلٰى تَقْوٰى مِنَ اللّٰهِ وَرِضْوَانٍ خَيْرٌ اَمْ مَّنْ اَسَّسَ بُنْيَانَهٗ عَلٰى شَفَا جُرُفٍ هَارٍ فَانْهَارَ بِهٖ فِيْ نَارِ جَهَنَّمَۗ وَاللّٰهُ لَا يَهْدِى الْقَوْمَ الظّٰلِمِيْنَ

afaman assasa bun-yānahū ‘alā taqwā minallāhi wa riḍwānin khairun am man assasa bun-yānahū ‘alā syafā jurufin hārin fanhāra bihī fī nāri jahannam(a), wallāhu lā yahdil-qaumaẓ-ẓālimīn(a).

तो कांई वै लोग जिका अल्लाह अर (उणरी) रीस री भक्ति रै कारण इमारतां (मस्जिद) बणावै है, वै चोखा है, या वै लोग जिका आपरी इमारतां नै उण खाई रै किनारे बणावै है जिको ढह जावै है, अर पछै (इमारत) बां रै साथै नरक मांय ढह जावै है? अल्लाह अन्यायी लोगां रो मार्गदर्शन कोनी करै