17
Q.S अल-लैल (92:17)
وَسَيُجَنَّبُهَا الْاَتْقَىۙ
wa sayujannabuhal-atqā.
आ हुनका मे सँ परम पुण्यात्मा केँ एहि सँ (नरक) दूर राखल जायत,
18
Q.S अल-लैल (92:18)
الَّذِيْ يُؤْتِيْ مَالَهٗ يَتَزَكّٰىۚ
allażī yu'tī mālahū yatazakkā.
जे अपन धन (अल्लाह के रास्ता में) खर्च करैत अछि (अपना के शुद्ध करय में),
19
Q.S अल-लैल (92:19)
وَمَا لِاَحَدٍ عِنْدَهٗ مِنْ نِّعْمَةٍ تُجْزٰىٓۙ
wa mā li'aḥadin ‘indahū min ni‘matin tujzā.
आ ओकरा पर केओ एहन अनुग्रह नहि केलक जे ओकरा चुकाबय पड़तैक।
20
Q.S अल-लैल (92:20)
اِلَّا ابْتِغَاۤءَ وَجْهِ رَبِّهِ الْاَعْلٰىۚ
illabtigā'a wajhi rabbihil-a‘lā.
मुदा (ओ केवल एहि लेल देलनि जे ओ अपन परमात्मा परमेश् वरक प्रसन्नता चाहैत छलाह |
21
Q.S अल-लैल (92:21)
وَلَسَوْفَ يَرْضٰى ࣖ
wa lasaufa yarḍā.
आ निश्चित रूप स भविष्य मे ओकरा (परफेक्ट) सुख भेटत।