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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Sejarah Sejarah Di Madinah Peperangan Perang Tabuk Penderitaan para sahabat dalam perang Tabuk

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117
Q.S अत-तवबाह के बा (9:117)

لَقَدْ تَّابَ اللّٰهُ عَلَى النَّبِيِّ وَالْمُهٰجِرِيْنَ وَالْاَنْصَارِ الَّذِيْنَ اتَّبَعُوْهُ فِيْ سَاعَةِ الْعُسْرَةِ مِنْۢ بَعْدِ مَا كَادَ يَزِيْغُ قُلُوْبُ فَرِيْقٍ مِّنْهُمْ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْۗ اِنَّهٗ بِهِمْ رَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ ۙ

laqat tāballāhu ‘alan-nabiyyi wal-muhājirīna wal-anṣāril-lażīnattaba‘ūhu fī sā‘atil-‘usrati mim ba‘di mā kāda yazīgu qulūbu farīqim minhum ṡumma tāba ‘alaihim, innahū bihim ra'ūfur raḥīm(un).

दरअसल अल्लाह नबी, मुहाजिरीन आ अंसार के तनबाह स्वीकार कर लिहले बाड़न, जे कठिन समय में नबी के पीछे चलत रहले, ओहमें से एगो समूह के दिल लगभग मुड़ला के बाद, तब अल्लाह ओह लोग के तनबाम कबूल कर लिहले बाड़न. सचहूँ अल्लाह ओह लोग पर परम कृपालु, दयालु हउवें,