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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - मुअमलाह व्यापार कर्ज़, ऋण कर्ज मुक्ति

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कुल श्लोक : 1
280
Q.S अल Baqarah (2:280)

وَاِنْ كَانَ ذُوْ عُسْرَةٍ فَنَظِرَةٌ اِلٰى مَيْسَرَةٍ ۗ وَاَنْ تَصَدَّقُوْا خَيْرٌ لَّكُمْ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُوْنَ

wa in kāna żū ‘usratin fanaẓiratun ilā maisarah(tin), wa an taṣaddaqū khairul lakum in kuntum ta‘lamūn(a).

और अगर (कर्ज़दार) तंगी में हो, तो उसे कुशादगी तक मोहलत दो। और अगर तुम (कर्ज़) माफ कर दो, तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है, अगर तुम जानते हो।