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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - सामान्य या नागरिक कानून बच्चे बच्चों की शिक्षा बच्चों को पढ़ाना बच्चों को स्वतंत्र रहना सिखाएं

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कुल श्लोक : 2
12
Q.S लुक़्मान (31:12)

وَلَقَدْ اٰتَيْنَا لُقْمٰنَ الْحِكْمَةَ اَنِ اشْكُرْ لِلّٰهِ ۗوَمَنْ يَّشْكُرْ فَاِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهٖۚ وَمَنْ كَفَرَ فَاِنَّ اللّٰهَ غَنِيٌّ حَمِيْدٌ

wa laqad ātainā luqmānal-ḥikmata anisykur lillāh(i), wa may yasykur fa'innamā yasykuru linafsih(ī), wa man kafara fa'innallāha ganiyyun ḥamīd(un).

और बेशक, हमने लुक़मान को हिकमत दी, कि 'अल्लाह का शुक्र कर! और जो कोई अल्लाह का शुक्र करता है, वह अपने लिए शुक्र करता है; और जो कुफ्र करता है, तो बेशक, अल्लाह बेनियाज़, बहुत तारीफ़ वाला है।'


13
Q.S लुक़्मान (31:13)

وَاِذْ قَالَ لُقْمٰنُ لِابْنِهٖ وَهُوَ يَعِظُهٗ يٰبُنَيَّ لَا تُشْرِكْ بِاللّٰهِ ۗاِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيْمٌ

wa iż qāla luqmānu libnihī wa huwa ya‘iẓuhū yā bunayya lā tusyrik billāh(i), innasy-syirka laẓulmun ‘aẓīm(un).

और (याद करो) जब लुक़मान ने अपने बेटे से कहा, जब वह उसे नसीहत दे रहा था, 'ऐ मेरे बेटे! अल्लाह के साथ शिर्क न कर, बेशक, शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है।'