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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - आपराधिक कानून, अपराध दूसरों पर व्यभिचार का आरोप लगाने का अपराध दूसरों पर व्यभिचार का आरोप लगाने की मंजूरी व्यभिचार का आरोप लगाने वाले को गाली देना

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Q.S एक-नूर (24:4)

وَالَّذِيْنَ يَرْمُوْنَ الْمُحْصَنٰتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوْا بِاَرْبَعَةِ شُهَدَاۤءَ فَاجْلِدُوْهُمْ ثَمٰنِيْنَ جَلْدَةً وَّلَا تَقْبَلُوْا لَهُمْ شَهَادَةً اَبَدًاۚ وَاُولٰۤىِٕكَ هُمُ الْفٰسِقُوْنَ ۙ

wal-lażīna yarmūnal-muḥṣanāti ṡumma lam ya'tū bi'arba‘ati syuhadā'a fajlidūhum ṡamānīna jaldataw wa lā taqbalū lahum syahādatan abadā(n), wa ulā'ika humul-fāsiqūn(a).

और जो लोग अच्छी औरतों पर (ज़िना का) इल्ज़ाम लगाते हैं और चार गवाह पेश नहीं करते, उन्हें अस्सी कोड़े मारो, और उनकी गवाही को हमेशा के लिए स्वीकार न करो। वे ही लोग हैं जो फासिक हैं,