48
Q.S जोनाह (10:48)
وَيَقُوْلُوْنَ مَتٰى هٰذَا الْوَعْدُ اِنْ كُنْتُمْ صٰدِقِيْنَ
wa yaqūlūna matā hāżal-wa‘du in kuntum ṣādiqīn(a).
और वे कहते हैं, 'यह धमकी (सजा) कब आएगी, यदि तुम सच्चे हो?'
148
Q.S के रूप में-Saffat (37:148)
فَاٰمَنُوْا فَمَتَّعْنٰهُمْ اِلٰى حِيْنٍ
fa'āmanū famatta‘nāhum ilā ḥīn(in).
तो उन्होंने ईमान लाया, इसलिए हमने उन्हें एक मुक़र्रर वक़्त तक ज़िंदगी की नेअमत दी।