قَالَتْ فَذٰلِكُنَّ الَّذِيْ لُمْتُنَّنِيْ فِيْهِ ۗوَلَقَدْ رَاوَدْتُّهٗ عَنْ نَّفْسِهٖ فَاسْتَعْصَمَ ۗوَلَىِٕنْ لَّمْ يَفْعَلْ مَآ اٰمُرُهٗ لَيُسْجَنَنَّ وَلَيَكُوْنًا مِّنَ الصّٰغِرِيْنَ
qālat fa żālikunnal-lażī lumtunnanī fīh(i), wa laqad rāwattuhū ‘an nafsihī fasta‘ṣam(a), wa la'il lam yaf‘al mā āmuruhū layusjananna wa layakūnam minaṣ-ṣāgirīn(a).
ओ (अल-अजीज के पत्नी) बजलीह, "ओ व्यक्ति अछि जे अहाँ केँ हमरा डाँटय लेल बाध्य केलक, कारण (हम ओकरा दिस आकर्षित छलहुँ), आ सचमुच, हम ओकरा वश मे करबाक लेल प्रलोभन देलहुँ मुदा ओ मना क' देलक। जँ ओ हमरा जे आदेश देने छलहुँ से नहि करत त' ओकरा जेल मे अवश्य राखल जायत, आ ओ घृणित व्यक्ति बनि जायत।"
قَالَ رَبِّ السِّجْنُ اَحَبُّ اِلَيَّ مِمَّا يَدْعُوْنَنِيْٓ اِلَيْهِ ۚوَاِلَّا تَصْرِفْ عَنِّيْ كَيْدَهُنَّ اَصْبُ اِلَيْهِنَّ وَاَكُنْ مِّنَ الْجٰهِلِيْنَ
qāla rabbis-sijnu aḥabbu ilayya mimmā yad‘ūnanī ilaih(i), wa illā taṣrif ‘annī kaidahunna aṣbu ilaihinna wa akum minal-jāhilīn(a).
यूसुफ कहलकै, "हे हमर प्रभु! हम हुनका लोकनिक आमंत्रण पूरा करबा सँ बेसी जेल पसिन करैत छी। जँ अहाँ हमरा हुनका लोकनिक धोखा सँ नहि बचा सकितहुँ त' हम (हुनकर इच्छा पूरा करबाक) झुकल रहितहुँ आ निश्चित रूप सँ हम ओहि मूर्ख लोक मे सँ एक रहितहुँ."
ثُمَّ بَدَا لَهُمْ مِّنْۢ بَعْدِ مَا رَاَوُا الْاٰيٰتِ لَيَسْجُنُنَّهٗ حَتّٰى حِيْنٍ ࣖ
Ṡumma badā lahum mim ba‘di mā ra'awul-āyāti layasjununnahū ḥattā ḥīn(in).
तखन (यूसुफक सत्यताक) संकेत देखलाक बाद हुनका सभक मोन मे आयल जे हुनका सभ केँ एकटा निश्चित समयक लेल जेल मे राखि देल जाय।
وَدَخَلَ مَعَهُ السِّجْنَ فَتَيٰنِ ۗقَالَ اَحَدُهُمَآ اِنِّيْٓ اَرٰىنِيْٓ اَعْصِرُ خَمْرًا ۚوَقَالَ الْاٰخَرُ اِنِّيْٓ اَرٰىنِيْٓ اَحْمِلُ فَوْقَ رَأْسِيْ خُبْزًا تَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْهُ ۗنَبِّئْنَا بِتَأْوِيْلِهٖ ۚاِنَّا نَرٰىكَ مِنَ الْمُحْسِنِيْنَ
wa dakhala ma‘ahus-sijna fatayān(i), qāla aḥaduhumā innī arānī a‘ṣiru khamrā(n), wa qālal-ākharu innī arānī aḥmilu fauqa ra'sī khubzan ta'kuluṭ-ṭairu minh(u), nabbi'nā bita'wīlih(ī), innā narāka minal-muḥsinīn(a).
आ हुनका संग दू टा युवक जेल मे चलि गेलाह। एक गोटे कहलकै, "निश्चित रूपेँ हम अंगूर दबाबय के सपना देखलहुँ" आ दोसर बाजल, "हम सपना देखलहुँ जे हम माथ पर रोटी ल' क' जा रहल छी, जाहि मे सँ किछु चिड़ै सभ खा गेल छल." हमरा सभकेँ तकविल दिअ। सचमुच, हम अहाँ केँ नीक काज करयवला मे सँ एक मानैत छी।