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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - Bangsa-bangsa terdahulu Nabi-nabi Kisah-kisah para rasul Nabi Yusuf AS Fitnah isteri pembesar Mesir (Zulaikha)

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कुल आयत : 9
23
Q.S यूसुफ (12:23)

وَرَاوَدَتْهُ الَّتِيْ هُوَ فِيْ بَيْتِهَا عَنْ نَّفْسِهٖ وَغَلَّقَتِ الْاَبْوَابَ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ۗقَالَ مَعَاذَ اللّٰهِ اِنَّهٗ رَبِّيْٓ اَحْسَنَ مَثْوَايَۗ اِنَّهٗ لَا يُفْلِحُ الظّٰلِمُوْنَ

wa rāwadathul-latī huwa fī baitihā ‘an nafsihī wa gallaqatil-abwāba wa qālat haita lak(a), qāla ma‘āżallāhi innahū rabbī aḥsana maṡwāy(a), innahū lā yuflihuẓ-ẓālimūn(a).

आ जे महिला ओ (यूसुफ) हुनकर घर मे रहैत छलाह, हुनका बहका देलकनि। ओ दरबज्जा सभ बन्न कऽ कहलथिन, “हमरा लग आबि जाउ।” यूसुफ कहलकै, "हम अल्लाह के शरण लैत छी, सचमुच हमर मालिक हमरा संग नीक व्यवहार केने छथि।" सत्ते, अन्यायी व्यक्ति भाग्यशाली नहि होयत।


24
Q.S यूसुफ (12:24)

وَلَقَدْ هَمَّتْ بِهٖۙ وَهَمَّ بِهَا ۚ لَوْلَآ اَنْ رَّاٰ بُرْهَانَ رَبِّهٖۗ كَذٰلِكَ لِنَصْرِفَ عَنْهُ السُّوْۤءَ وَالْفَحْشَاۤءَۗ اِنَّهٗ مِنْ عِبَادِنَا الْمُخْلَصِيْنَ

wa laqad hammat bihī wa hamma bihā lau lā ar ra'ā burhāna rabbih(ī), każālika linaṣrifa ‘anhus-sū'a wal-faḥsyā'(a), innahū min ‘ibādinal-mukhlaṣīn(a).

आ सचमुच, ओ महिला हुनका (यूसुफ) के इच्छा केने छलीह। आ यूसुफ सेहो हुनका लेल कामना करैत छलाह, जँ हुनका अपन प्रभु सँ कोनो निशानी (से) नहि देखलनि । एहि तरहें हम सभ हुनका सँ दुष्टता आ घृणित काज केँ मोड़ि देलियनि। सचमुच, ओ (यूसुफ) हमर चुनल सेवक मे छथि।


25
Q.S यूसुफ (12:25)

وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيْصَهٗ مِنْ دُبُرٍ وَّاَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَا الْبَابِۗ قَالَتْ مَا جَزَاۤءُ مَنْ اَرَادَ بِاَهْلِكَ سُوْۤءًا اِلَّآ اَنْ يُّسْجَنَ اَوْ عَذَابٌ اَلِيْمٌ

wastabaqal-bāba wa qaddat qamīṣahū min duburiw wa alfayā sayyidahā ladal-bāb(i), qālat mā jazā'u man arāda bi'ahlika sū'an illā ay yusjana au ‘ażābun alīm(un).

आ दुनू गोटे दौड़ल दरबज्जा दिस बढ़ल, आ ओ महिला ओकर (यूसुफक) वस्त्र पाछूसँ खींचलक जाबत धरि ओ फाटि गेलैक, आ दुनू गोटे ओकर पतिकेँ दरबज्जा पर भेटल। ओ (स्त्री) कहलथिन, "जे अहाँक पत्नीक प्रति अधलाहक इरादा रखैत अछि, ओकरा की इनाम भेटत, सिवाय जेल मे बंद करबाक वा (दण्ड) कष्टदायक यातना सँ?"


26
Q.S यूसुफ (12:26)

قَالَ هِيَ رَاوَدَتْنِيْ عَنْ نَّفْسِيْ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّنْ اَهْلِهَاۚ اِنْ كَانَ قَمِيْصُهٗ قُدَّ مِنْ قُبُلٍ فَصَدَقَتْ وَهُوَ مِنَ الْكٰذِبِيْنَ

qāla hiya rāwadatnī ‘an nafsī wa syahida syāhidum min ahlihā, in kāna qamīṣuhū qudda min qubulin fa ṣadaqat wa huwa minal-kāżibīn(a).

ओ (यूसुफ) कहलनि, “ओएह छथि जे हमरा बहका देलनि आ बहका देलनि।” महिला केरऽ परिवार केरऽ एगो गवाह न॑ गवाही देलकै, “जदि ओकरऽ वस्त्र सामने म॑ फाटलऽ छै त॑ महिला सच बोलै छै, आरू वू (यूसुफ) झूठा म॑ स॑ एक छै ।


27
Q.S यूसुफ (12:27)

وَاِنْ كَانَ قَمِيْصُهٗ قُدَّ مِنْ دُبُرٍ فَكَذَبَتْ وَهُوَ مِنَ الصّٰدِقِيْنَ

wa in kāna qamīṣuhū qudda min duburin fa każabat wa huwa minaṣ-ṣādiqīn(a).

आ जँ ओकर वस्त्र पीठ मे फाटि गेल छैक तखन ओ महिला अछि जे झूठ बाजि रहल अछि, आ ओ (यूसुफ) सच्चाई मे सँ एक अछि।”


28
Q.S यूसुफ (12:28)

فَلَمَّا رَاٰ قَمِيْصَهٗ قُدَّ مِنْ دُبُرٍ قَالَ اِنَّهٗ مِنْ كَيْدِكُنَّ ۗاِنَّ كَيْدَكُنَّ عَظِيْمٌ

falammā ra'ā qamīṣahū qudda min duburin qāla innahū min kaidikunn(a), inna kaidakunna ‘aẓīm(un).

अस्तु, जखन ओ (स्त्रीक पति) देखलनि जे हुनकर (यूसुफक) वस्त्र पीठ पर फाटल छनि त' बजलाह, "सत्ते, ई अहाँक चाल अछि. अहाँक चाल सचमुच पैघ अछि."


29
Q.S यूसुफ (12:29)

يُوْسُفُ اَعْرِضْ عَنْ هٰذَا وَاسْتَغْفِرِيْ لِذَنْۢبِكِۖ اِنَّكِ كُنْتِ مِنَ الْخٰطِـِٕيْنَ ࣖ

yūsufu a‘riḍ ‘an hāżā wastagfirī liżambik(i), innaki kunti minal-khāṭi'īn(a).

हे यूसुफ! "ई बात बिसरि जाउ, आ (हमर पत्नी) अपन पापक क्षमा माँगू, कारण अहाँ दोषी लोक मे सँ एक छी।"


30
Q.S यूसुफ (12:30)

۞ وَقَالَ نِسْوَةٌ فِى الْمَدِيْنَةِ امْرَاَتُ الْعَزِيْزِ تُرَاوِدُ فَتٰىهَا عَنْ نَّفْسِهٖۚ قَدْ شَغَفَهَا حُبًّاۗ اِنَّا لَنَرٰىهَا فِيْ ضَلٰلٍ مُّبِيْنٍ

wa qāla niswatun fil-madīnatimra'atul-‘azīzi turāwidu fatāhā ‘an nafsih(ī), qad syagafahā ḥubbā(n), innā lanarāhā fī ḍalālim mubīn(in).

आ शहरक महिला सभ बजलीह, "अल-अजीजक पत्नी अपन नौकर केँ बहकाबैत अछि आ बहकाबैत अछि जे ओकरा वश मे करय; ओकर नौकर ओकरा सही मायने मे प्रेमक नशा मे धुत्त बना दैत छैक। हम सभ ओकरा स्पष्ट गलती मे अवश्य देखैत छी।"


32
Q.S यूसुफ (12:32)

قَالَتْ فَذٰلِكُنَّ الَّذِيْ لُمْتُنَّنِيْ فِيْهِ ۗوَلَقَدْ رَاوَدْتُّهٗ عَنْ نَّفْسِهٖ فَاسْتَعْصَمَ ۗوَلَىِٕنْ لَّمْ يَفْعَلْ مَآ اٰمُرُهٗ لَيُسْجَنَنَّ وَلَيَكُوْنًا مِّنَ الصّٰغِرِيْنَ

qālat fa żālikunnal-lażī lumtunnanī fīh(i), wa laqad rāwattuhū ‘an nafsihī fasta‘ṣam(a), wa la'il lam yaf‘al mā āmuruhū layusjananna wa layakūnam minaṣ-ṣāgirīn(a).

ओ (अल-अजीज के पत्नी) बजलीह, "ओ व्यक्ति अछि जे अहाँ केँ हमरा डाँटय लेल बाध्य केलक, कारण (हम ओकरा दिस आकर्षित छलहुँ), आ सचमुच, हम ओकरा वश मे करबाक लेल प्रलोभन देलहुँ मुदा ओ मना क' देलक। जँ ओ हमरा जे आदेश देने छलहुँ से नहि करत त' ओकरा जेल मे अवश्य राखल जायत, आ ओ घृणित व्यक्ति बनि जायत।"