ذُرِّيَّةَ مَنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوْحٍۗ اِنَّهٗ كَانَ عَبْدًا شَكُوْرًا
Żurriyyata man ḥamalnā ma‘a nūḥ(in), innahū kāna ‘abdan syakūrā(n).
(हे) जिनका हम नूह के संग अनने रही हुनकर वंशज। सचमुच, ओ (नूह) एकटा (अल्लाह) के सेवक छलाह जे बहुत आभारी छलाह |"
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى الْاٰخِرِيْنَ ۖ
wa taraknā ‘alaihi fil-ākhirīn(a).
आ हम सभ बाद मे आयल लोक मे नुह (स्तुति) लेल सुरक्षित रखलहुँ;
سَلٰمٌ عَلٰى نُوْحٍ فِى الْعٰلَمِيْنَ
salāmun ‘alā nūḥin fil-‘ālamīn(a).
"समृद्धि (हम सभ दुनियाँ मे नूह केँ देलियैक)।"
اِنَّا كَذٰلِكَ نَجْزِى الْمُحْسِنِيْنَ
innā każālika najzil-muḥsinīn(a).
सचमुच, हम सब नीक काज करय वाला के एहि तरहे पुरस्कृत करैत छी।
اِنَّهٗ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِيْنَ
innahū min ‘ibādinal-mu'minīn(a).
सचमुच, ओ हमरा सभक विश्वासी सेवक मे छथि।
ضَرَبَ اللّٰهُ مَثَلًا لِّلَّذِيْنَ كَفَرُوا امْرَاَتَ نُوْحٍ وَّامْرَاَتَ لُوْطٍۗ كَانَتَا تَحْتَ عَبْدَيْنِ مِنْ عِبَادِنَا صَالِحَيْنِ فَخَانَتٰهُمَا فَلَمْ يُغْنِيَا عَنْهُمَا مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔا وَّقِيْلَ ادْخُلَا النَّارَ مَعَ الدّٰخِلِيْنَ
Ḍaraballāhu maṡalal lil-lażīna kafarumra'ata nūḥiw wamra'ata lūṭ(in), kānatā taḥta ‘abdaini min ‘ibādinā ṣāliḥaini fa khānatāhumā falam yugniyā ‘anhumā minallāhi syai'aw wa qīladkhulan-nāra ma‘ad-dākhilīn(a).
अल्लाह काफिर, नूह के पत्नी आ लूत के पत्नी के लेल एकटा दृष्टान्त बनौलनि। दुनू हमर सेवक मे दू टा पुण्य सेवकक देखरेख मे अछि; तखन दुनू पत्नी अपन दुनू पति के संग धोखा केलक, मुदा दुनू पति अल्लाह के (अत्याचार) स कनिको मदद नहि क सकल; आ कहल गेल जे (दुनू पत्नी सँ) "अहाँ दुनू गोटे (नरक) जायबला सभक संग नरक मे जाउ।"