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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



विषय - पिछले राष्ट्र नबियों प्रेरितों की कहानियाँ पैगंबर इब्राहिम ए.एस पैगंबर इब्राहिम एएस की विशेषताएं।

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कुल श्लोक : 5
124
Q.S अल Baqarah (2:124)

۞ وَاِذِ ابْتَلٰٓى اِبْرٰهٖمَ رَبُّهٗ بِكَلِمٰتٍ فَاَتَمَّهُنَّ ۗ قَالَ اِنِّيْ جَاعِلُكَ لِلنَّاسِ اِمَامًا ۗ قَالَ وَمِنْ ذُرِّيَّتِيْ ۗ قَالَ لَا يَنَالُ عَهْدِى الظّٰلِمِيْنَ

wa iżibtalā ibrāhīma rabbuhū bikalimātin fa atammahunn(a), qāla innī jā‘iluka lin-nāsi imāmā(n), qāla wa min żurriyyatī, qāla lā yanālu ‘ahdiẓ-ẓālimīn(a).

और (याद करो), जब इब्राहीम को उनके रब ने कुछ शब्दों से आज़माया, और उन्होंने उसे पूरा किया। वह (अल्लाह) बोला, 'मैं तुम्हें तमाम इंसानों का इमाम (नेता) बनाऊँगा।' उसने (इब्राहीम ने) कहा, 'और मेरी औलाद में से भी?' अल्लाह ने कहा, '(हाँ, लेकिन) मेरा वादा ज़ालिमों के लिए नहीं है।'


75
Q.S कनटोप (11:75)

اِنَّ اِبْرٰهِيْمَ لَحَلِيْمٌ اَوَّاهٌ مُّنِيْبٌ

inna ibrāhīma laḥalīmun awwāhum munīb(un).

इब्राहीम निश्चय ही बहुत सहनशील, कोमल हृदय और (अल्लाह की ओर) बार-बार लौटने वाला था।


120
Q.S एक Nahl (16:120)

اِنَّ اِبْرٰهِيْمَ كَانَ اُمَّةً قَانِتًا لِّلّٰهِ حَنِيْفًاۗ وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَۙ

inna ibrāhīma kāna ummatan qānital lillāhi ḥanīfā(n), wa lam yaku minal-musyrikīn(a).

निश्चित रूप से इब्राहीम एक इमाम (नमूना) थे, अल्लाह के आज्ञाकारी और हनीफ़। और वह मुशरिकों में से नहीं थे।


121
Q.S एक Nahl (16:121)

شَاكِرًا لِّاَنْعُمِهِ ۖاجْتَبٰىهُ وَهَدٰىهُ اِلٰى صِرَاطٍ مُّسْتَقِيْمٍ

syākiral li'an‘umih(ī), ijtabāhu wa hadāhu ilā ṣirāṭim mustaqīm(in).

वह उसकी नेमतों का शुक्र करता था। अल्लाह ने उसे चुना और उसे सीधे रास्ते की हिदायत दी।


123
Q.S एक Nahl (16:123)

ثُمَّ اَوْحَيْنَآ اِلَيْكَ اَنِ اتَّبِعْ مِلَّةَ اِبْرٰهِيْمَ حَنِيْفًا ۗوَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِيْنَ

Ṡumma auḥainā ilaika anittabi‘ millata ibrāhīma ḥanīfā(n), wa mā kāna minal-musyrikīn(a).

फिर हमने तुम्हें (मुहम्मद) वह्य की, 'इब्राहीम की सच्ची दीन की पैरवी करो, और वह मुशरिकों में से नहीं था।'